Jiddi Medhak। जिद्दी मेढक । मोटिवेशनल कहानी हिंदी में

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एक बहुत ही घना जंगल था और उस जंगल के बीचों बीच एक ऊँची पहाड़ की चोटी थी । उस जंगल में बहुत सारे जंगली जानवर रहा करता था।

एक बार उस जंगल के सभी जानवर ने मिलकर एक प्रतियोगिता रखा। सभी ने मिलकर एक शर्त रखी – जो जानवर इस पहाड़ की सबसे ऊँची चोटी पर चढ़ जायेगा ,वह इस जंगल की सबसे तेज औऱ बहादुर जानवर कहलाएगा।
यह बात पूरे जंगल मे आग की तरह फैल गयी। सभी जानवर इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए एक जगह एकत्रित होने लगा ।

इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उस जंगल की एक मेढक झुंड भी शामिल होने आया था। मेढक झुंड को देखकर सभी जानवर मजाक उड़ाने लगा।
कोई कहता – देखो ये आया है पहाड़ चढ़ने, अगर किसी के पैर के नीचे आ गया तो सीधा पहाड़ से यमलोक पहुँच जाएगा।
कोई कहता – अगर पहाड़ से नीचे गिरा तो इसे नीचे आने से पहले इसकी साँसे गुल हो जाएगा ।

लेकिन मेढक की झुण्ड ने इन सभी के बातों को नजरअंदाज कर चुप चाप आकर सभी के साथ बैठे रहा ।
हाथी ने कहा, “देखो भाई ! तुम लोग छोटे प्राणी हो ,जंगल मे जाओ और मस्ती करो , जिंदगी चैन से बिताओ । क्यों इन सब की चक्कर मे पड़ कर अपनी जिंदगी बर्बाद करना चाहते हो ?”

लेकिन मेढकों ने किसी की बात नही सुनी ।
अगली दिन सुबह प्रतियोगिता शुरू हुई , सभी जानवर पूरे जोश के साथ पहाड़ पर चढ़ रहा था । मेढक भी अपनी टीम के साथ पहाड़ पर आगे बढ़ रहा था ।
लेकिन कुछ ही समय बाद धीरे-धीरे कुछ जानवर की हिम्मत हारने लगी ।और कुछ -कुछ जानवर वापस लौटने लगा। मेढक की झुंड ने जब अन्य जानवर को लौटते देखा तो , मेढक की झुंड से भी कुछ मेढक वापस लौटने लगा।

दोपहर होते -होते लगभग आधे से अधिक जानवर वापस आ गयें। जंगल के बड़े -बड़े जानवर हाथी,ऊंट यहाँ तक शेर ,भालु आदि सब वापस लौटने लगें।
अब सभी जंगली जानवर को लगने लगा था ,इस पहाड़ पर चढ़कर अपनी जान गवाने से अच्छा है वापस लौट जाना ।
अब शाम होने को आ रही थी। सूरज की लालिमा प्रकाश पहाड़ के चोटी पर पड़ रही थी सिर्फ एक मेढक को छोड़कर सभी जानवर वापस आ चुकी थी । सभी जानवर के वापस आने के वाबजूद सिर्फ एक मेढक ही आगे अकेला बढ़ रहा था ।
यह देखकर सभी जानवर और उसके दोस्त जोर -जोर से आवाज देकर वापस बुलाने लगे । लेकिन वापस आने की जगह वो मेढ़क और तेजी से ऊपर ही चढ़ता जा रहा था ।

सभी जानवर जितना चिल्लाकर वापस बुलाते, वो मेढ़क उतना तेजी से और आगे बढ़ता । सभी जानवर उसे बुलाता रहा औऱ मेढक आगे बढ़ता चला गया ।

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कुछ समय बाद वो मेढ़क अकेला ही उस पहाड़ की सबसे ऊंची चोटी पर चढ़ गया और इस प्रतियोगिता के विजेता बना ।
जब मेढक ने नीचे वापस आया तो सभी ने पूछा , “हम लोग के इतना मना करने के बावजूद तुम आगे क्यो बढ़ता जा रहा था ?”

यह सुनकर विजेता मेढक ने कहा, “क्या तुम लोग मुझे मना कर रहे थे ? मुझे लग रहा था तुम लोग चिलाकर आगे बढ़ने का हौसला बढ़ा रहे थे ।”

यह सुनकर सभी जानवर दंग रह गये। आप लोग को यह जानकर आश्चर्य होगा कि वह मेढक की कान में प्रॉब्लम थी जिसके वजह से वह उन जानवरों की आवाज़ नही सुन पाता था ।

जिसके कारण जब उसे सभी वापस आने के लिए कह रहा था तब वह सुन नही पा रहा था । और वह आगे बढ़ता जा रहा था ।
अगर वह सब की बात सुनता तो वह भी अन्य जानवर की तरह हौसला तोड़ देता क्योकि वहां सब लोग negative बाते ही बोल रहा था । और यही कारण था कि सभी जानवर एक -दूसरे की बात सुनकर वापस लौट गया था ।

दोस्तो हमारी जिंदगी में भी यही होती हैं ।हमारे आसपास बहुत सारे ऐसे लोग मिल जाएंगे जो खुद तो कुछ नही कर पाते हैं लेकिन करने वालो की हौसला तोड़ने में लगा रहता है।
दोस्तो अगर हमें सफल होना है तो हमें भी अपने कानों को बंद कर लेने होंगे, यानी negative बात करने वालों से दूर रहना होगा और अपनी मेहनत को बिना रोके निरन्तर प्रयास करते रहना होगा ।


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1 Comment

  1. Vry nyyc and motivational story👍

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