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Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी। Part – 15। हिंदी कहानी

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Author- अविनाश अकेला 

तेरी-मेरी आशिकी का Part- 14 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

“अरे बातें तो हम फ़ोन से भी खूब किया करते हैं फिर इसके लिए घर जाने की क्या जरूरत है छोटे बाबू! ऐसा तो नहीं तुम्हारा कुछ और इरादा है?” उसने मुझे  छेड़ते हुये बोली ।

“अरे ऐसी कोई बात नहीं है मेरी दीपा डार्लिंग, वह क्या है ना तुम्हारी दोस्त की दीदी तुम्हें बुलाती रहती है तो सोचा आज तुम्हें साथ लेकर चले ।” मैंने भी उसे चिढाते हुए बोल।

“हां यार मुझे भी आदिति दी (दीदी ) से मिलना है । बहुत दिन से उनसे नहीं मिल पाई हूं ।” दीपा कुछ सोचती हुई बोली ।

“तो फिर चलो ।” 

दीपा मेरे साथ घर  जाने को तैयार हो गयी । दीपा कुछ हीं देर बाद मेरे घर में थी । एक कमरे में मैं, दीपा, आदिती  भाभी और मेरी मां एक साथ बैठकर बातचीत कर रहे थे ।

“दीपा तुम्हारी बातचीत अंजलि से होती है? अदिति भाभी बोली ।

“हां कल ही तो बात हुई है । अंजली बोल रही  थी उसे वहां मन नहीं लगती है। वह वापस अपने शहर में ही रहकर पढ़ना चाहती  हैं ।” दीपा बोली ।

अंजली  आदिति भाभी की छोटी बहन और दीपा की  बेस्ट फ्रेंड है। मैं अभी तक अंजलि से सिर्फ एक बार ही मिला था वो भी  अर्जुन भैया के विवाह  के समय । वैसे अंजली के वजह से ही मैं दीपा के करीब आया हूं । क्योंकि अगर  अंजलि दीपा की फ्रेंड नहीं होती तो शायद दीपा को  मेरे भैया की शादी में मिल पाना असंभव होता।

“यहां तो अंजली  2 दिन पहले ही कॉल की थी ।” भाभी बोली ।

“वैसे मुझसे तो अंजली  की हमेशा बातचीत होती रहती है ।” दीपा  बोली ।

इस तरह से वहां पर अंजली की बातें कुछ मिनटों तक होती रही, इसके बाद आदिती  भाभी और दीपा किचन के तरफ चली गई और दोनों मिलकर कुछ स्पेशल खाने में बनाने लगी । मैं अपने कमरे में आकर देवांशु के बारे में सोचने लगा ।

मैं कॉलेज में ज्यादा लोगों से मेल-मिला नहीं रखता था लेकिन फिर भी इतने दिनों में मेरे कई दोस्त बन चुके थे । इनमें से अधिकांश दोस्त मेरे क्लासमेट ही थे बाकी 1-2 स्टूडेंट दोस्त सीनियर भी थे । जिनके साथ मैं अक्सर फुटबॉल खेलने चल जाया करता था ।

मैं उस वक्त देवांशु के बारे में  कुछ सोच ही रहा था कि मेरे एक सीनियर क्लास के दोस्त ने कॉल किया।

“हेलो!… बोलिए राहुल भैया, कैसे कॉल करना हुआ?” मैंने कॉल उठाते ही बोला ।

“बस समझो ऐसे ही…. और सब बताओ क्या चल रहा है ?” राहुल भैया बोले ।

“कुछ खास नहीं बस घर पर बैठे हैं ।” 

“छात्र संघ के चुनाव में किसे सपोर्ट करने वाले हो” राहुल भैया ने पूछा ।

अपने सीनियर स्टूडेंट राहुल भैया का यह प्रश्न सुनकर मुझे लगा ये छात्र संघ चुनाव के किसी उम्मीदवार को वोट डालने के लिए कहने के लिए मुझे कॉल किये हैं ।

“भैया अभी तो कुछ डिसाइड नहीं किया है, मगर जो अच्छा उम्मीदवार होगा, जो कॉलेज के बारे में सोचेगा, रैगिंग बंद करायेगा  और सबसे बड़ी बात जो  कॉलेज में चली आ रही फैकल्टी प्रॉब्लम को दूर करने के बारे में सोचेगा हम तो अपना मत उसी को देंगे ।” मैंने बोला ।

“तब तो मेरे समझ से तुम किसी को वोट नहीं दोगे ।” राहुल  भैया बोले ।

“ऐसा क्यों आपको लग रहा है ?” मैंने आश्चर्य होकर पूछा ।

“क्योंकि तुम जिस तरह के उम्मीदवार खोज रहे हो उस तरह की कोई भी उम्मीदवार अपने कॉलेज में नहीं है ।” राहुल भैया  बोले ।

“ऐसा आप क्यों बोल रहे हैं ? कॉलेज में  तो बहुत सारे ऐसे उम्मीदवार हैं जो कॉलेज के बारे में सोचते हैं । अब आप देवांशु को ही ले लीजिये  कितना अच्छा उम्मीदवार है ।” मैंने चुटकी लेते हुए बोला ।

“चल हट… तू किसका बात कर रहा है ! पहली बात की  देवांशु फर्स्ट इयर का जूनियर स्टूडेंट है, दूसरी बात की वह एक नंबर का निहायती बेवकूफ और एयासी  इंसान हैं । उसे लड़कियों के पीछे चक्कर मारने से  छुट्टी मिलेगा तब ना कॉलेज के बारे में सोचेगा ।” उन्होंने तपाक से जवाब दिया ।

“लेकिन उसके क्लास के तो सभी विधार्थियां देवांशु के बहुत बड़े प्रशंसक हैं खासकर के लड़कियां ।” मैंने बोला ।

“यह सब बकवास बातें  हैं । हां यह जरूर है कि कुछ लड़कियां उसके शोऑफ के वजह से उस पर विश्वास करती है ।” राहुल बोले।

“वैसे आपकी टीम से तो ऋषि भैया चुनाव लड़ रहे  हैं तो आप का वोट तो निश्चित उनके लिए ही होगा?” मैंने पूछा।

“नहीं , कुछ महीनों से हम लोगों के बीच अनवन चल रही है । इस बार मेरा उसका सपोर्ट नहीं रहेगा । हम सभी दोस्तों ने मिलकर यह डिसाइड किया है कि हम में से कोई भी विद्यार्थी ऋषि को वोट नहीं करेगा और ना ही उसके सपोर्ट में आएगा”

“मैं तो बहुत दिनों से देख रहा हूं ऋषि और आपके कई सारे फ्रेंड सब एक साथ  ही थे फिर अचानक से अलग, ऐसा क्यों ?” मैंने पूछा ।

“हां ! कुछ प्रॉब्लम थे जिसके वजह से  हम लोग उसका सपोर्ट  ना करने का फैसला लिया हैं और हम सब दोस्तों ने सोचा है इस बार हम किसी दूसरे उम्मीदवार को वोट करेंगे  या फिर हम कोई दूसरा उम्मीदवार ही खड़ा करेंगे जो इस कॉलेज के लिए बेहतर होगा ।” राहुल भैया ने जबाब दिया ।

“तो फिर आप लोगों ने किस उम्मीदवार को अपना मत देने का डिसाइड किया है?” मैंने पूछा ।

“इनमें से किसी उम्मीदवार को वोट तो नहीं देंगे मगर हम लोगों ने सोचा है एक नया उम्मीदवार खड़ा करेंगे और और सभी लोगों ने तुम्हारा नाम सुझाव किया है, मैं तुम्हे यही बात बताने के लिए ही कॉल किया हूँ ।  हम सभी दोस्तों को मानना है, हम में  से कोई ऋषि के खिलाफ  चुनाव में खड़े होकर विरोध नहीं करना चाहिए क्योंकि  इससे हमारे  निजी तौर पर दुश्मनी पैदा हो सकती है ।” राहुल भैया ने जबाब दिया ।

“क्या…. मेरा नाम? अरे मैं तो नया विद्यार्थी हूं , मुझे वोट कौन करेगा ?  मैं तो कभी कॉलेज की किसी सोशल वर्क में भी अपना सहयोग नहीं दिया है ,ना लोगों के बीच ज्यादा कुछ जान पहचान है । ना बाबा ना! मैं छात्र संघ चुनाव के लिए खड़ा नहीं हो सकता । आप किसी और को देख देख लीजिए ।”मैंने समझाते हुए बोला।

“देखो हम दोस्तों ने तो फाइनल डिसाइड कर लिया है कि इस चुनाव में तुम्हें  उम्मीदवार बनाया जाएगा । अब बात रही की तुम्हारे ज्यादा लोगों से  जान पहचान नहीं है । जिससे तुम्हे सपोर्ट  कम मिलेंगे! लेकिन निशांत हम लोग तुम्हारे साथ हैं और मैंने इस कॉलेज में 3 साल समय दिया है जिसके कारण मेरे बहुत सारे दोस्त भी बने हैं  और सभी दोस्तों के  भी बहुत सारे गर्ल्स-बॉयज दोस्त हैं। वो सभी मेरे साथ हैं । मैं दावे के साथ कहता  हूं अगर तुम इस चुनाव में खड़ा हुआ तो जिताने की जिम्मेदारी मेरी होगी ।……बाकी तुम सोचो क्या करना है?”  राहुल भैया  मुझे समझाते हुए बोला।

राहुल भैया  की  बात सुनकर मैं थोड़ा असमंजस की स्थिति में आ गया । उस वक्त मुझे कुछ समझ में नहीं आ रही थी कि आखिर उन्हें हां बोलो या ना । मैंने अब तक किसी भी प्रतियोगिता या चुनाव में भाग नहीं लिया था ।

 जिसके कारण मैं अंदर से डर भी रहा था कि अगर चुनाव  हार गया तो  बेइज्जती ऊपर से हो जाएगी ।

Continue ……

 

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This entry is part 15 of 23 in the series तेरी - मेरी आशिक़ी

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