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Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी।Part – 18। हिंदी कहानी

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Author- अविनाश अकेला 

तेरी-मेरी आशिकी का Part- 17 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

मेरी जीत पर कॉलेज के सभी छात्र-छात्राएं काफी खुश थे। मैं भी काफी खुश था। और मैं चाहता था मेरी जीत की जानकारी मेरे घर वालों को भी होनी चाहिए। ताकि वो भी मेरी जीत के खुशी के जश्न मनाये। इसलिए यह खुशखबरी बताने के लिए मैंने अपनी मां को फोन किया।

“हेलो मां , मैं निशांत बोल रहा हूं”

“हां छोटे बोलो।  कॉलेज से वापस कब आ रहे हो।” मां बोली।

“मां मैं छात्र संघ चुनाव जीत गया, मैं कॉलेज का छात्र नेता बन गया हूँ।” मैंने अपनी खुशी को दुगना करते हुए मां को बताया।

“बेटा देखो अपने पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दो। और अगर पढ़ाई लिखाई नहीं हो रहा है तुम से तो भैया का ऑफिस ज्वाइन कर लो।” मां थोड़ी चिढ़ी हुई बोली।

मुझे लगा छात्र नेता बनने की खुशखबरी सुनकर मेरी माँ खुश होगी।  मगर वह तो चिढ़ सी गयी।

“मां….”

“मैं तुझे कितनी बार समझायी हूँ। इन सब चक्करो में मत पड़ो।”  मां बोली।

मेरे जीत पर माँ से इस तरह की बात सुनकर मैं उदास हो गया।

मैं उदास होकर कॉलेज के कॉरिडोर में खड़ा था । उसी वक्त कुछ लड़के-लड़कियां अपने हाथों में माले लिए मेरे पास आया।

“कांग्रेचुलेशन निशांत ।आपकी जीत के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं।” सभी एक साथ बोला।

“थैंक यू….. थैंक यू….”

उन सभी लोगों ने मुझे  शुभकामनाएं देकर वापस लाइब्रेरी की ओर चले गए उसके बाद वहां दीपा आई।

“निशांत क्या हुआ उदास लग रहे हो ?”  दीपा आते ही मेरे हाथ को पकड़ती हुई बोली।

“नहीं, बस ऐसे ही” मैंने कहा।

“कुछ तो बात है, वरना ऐसे उदास ना होते। देखो तुम्हारी जीत की खुशी में सारी कॉलेज जश्न मना रही है और तुम यहां उदास एकांत में खड़े हो । कहीं तुम्हें देवांशु ने कुछ कहा तो नही?” मेरी उदासी को झांकती हुई बोली।

“नही, नही। मुझे देवांशु से अभी कोई मुलाकात नहीं हुआ है । मां से बात हुई है।  मेरी जीत पर मां खुश नहीं है और वो ये सब छोड़ कर मुझे भैया के ऑफिस ज्वाइन करने के लिए बोल रही है।” 

“बस इतनी सी बात के लिए मेरे राजा बाबू उदास है। ओहो… निशांत यह सारी बातें छोड़ो हम लोग इस बारे में घर पर चलकर मां से बात कर लेंगे। अभी चलो ।  देखो सारे लड़के – लड़कियां तुम्हें खोज रहे हैं और राहुल भैया भी तुम्हें ही ढूंढ रहे हैं।”दीपा मुझे जबरदस्ती वहां से बाहर खिंचती हुई बोली।

“तो आप दोनों छुपकर ईधर खड़े हैं भाई साहब। मेरे वजह से ही जीते हो और जीतते ही मुझसे दूर निकल रहे हो।” राहुल भैया नजदीक आते ही मजाक से बोले।

“नहीं भैया ऐसी कोई बात नहीं है। आपको कैसे भूल सकता हूँ ?  चलिए बैठकर बात करते हैं।”

हम लोग कॉलेज के सेमिनार हॉल में चले गए। राहुल भैया कुछ और  लड़के को कॉल करके और बुला लिए। हम लोगों ने इस जीत को किसी एक की व्यक्तिगत जीत ना मानते हुए। इसमें सामिल सारे लोगों के जीत समझा।

उस समय हम लोगों के बीच कुछ बातें हुई और इसे जीत को सेलिब्रेट करने का 1 दिन निर्धारित किया। इसके बाद कॉलेज के बंद होने से पहले हम सभी अपने-अपने घर जाने के लिए निकल आये वहां से।

“दीपा अब तक तुम्हारे भैया नहीं आए हैं तुम्हें रिसीव करने के लिए” मैंने दीपा से पूछा।

“वो आज आएंगे भी नही ,क्योंकि वो एक रिश्तेदार के शादी में बाहर गए हुए हैं।” दिपा चहकती हुई बोली।

“वाह!”

“अच्छा , एक अबला नारी घर में अकेली रहने वाली है और तुम वाह ! बोल रहे हो छोटे बाबू।” उसने मुझे छेड़ने के मुंड से बोली।

“तो मैं चलूं तुम्हारे साथ , आज इस अबला नारी के साथ ही रात बिताते है।” मैंने भी मस्ती के लिए बोल दिया।

“यह भी भला कोई पूछने वाली बात है! चलो।” इतना बोल कर दीपा मेरे बाइक के पास जाकर खड़ी हो गई। मैंने भी मौका का नजाकत उठाकर बाइक को स्टार्ट कर उसके घर की ओर चल दिया।

उसके बाद दीपा के घर के लिए निकल पड़े। रास्ते में हम दोनों खूब बकबक करते रहे हैं। हमारी रास्ते खत्म हो गई मगर दीपा की बकबक अभी तक भी खत्म नहीं हुई थी।

“नीचे उतारिए बकबक करने वाली मेरी प्यारी दीपा जी।” मैंने बाइक को उसके घर के पास रोकते हुए बोला।

“ओहो…मुझे लगा तुम मेरी प्यारी जानेमन बोलोगे लेकिन तूने तो प्यारी दीपा बोल कर मेरा दिल ही तोड़ दिया तुमने।” दीपा दांत निकाल कर हंसती हुई बोली।

मैं भी उसकी बात सुन कर मुस्कुरा दिया। मैं दीपा को उसके तक छोड़कर वापस अपने घर वापस जाने लगा। तभी दिपा बोली ,”तो आज मेरे छोटे बाबू इस अबला नारी को इस सुनसान रात को घर में अकेले ही छोड़ कर चले जायेगें?”

Continue…..

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This entry is part 18 of 23 in the series तेरी - मेरी आशिक़ी

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