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Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी। शपत समारोह । Part – 20 । हिंदी कहानी

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Author- अविनाश अकेला 

 

तेरी-मेरी आशिकी का Part- 19 पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

 

ठीक 7:00 बजे डेकोरेशन वाले कॉलेज परिसर में पहुंच चुका था। वह अपने गाड़ी से डेकोरेट करने वाले सारे सामान को उतारकर एक जगह रख रहा था। दूसरी तरफ कॉलेज के कुछ विद्यार्थी शीतल डीजे साउंड के साउंड बॉक्स को कॉलेज के थर्ड फ्लोर पर रखने के लिए जिद कर रहे थे।

उन छात्रों क कहना था , “कॉलेज में होने वाली शपथ समारोह और हमारे नए छात्र नेता के भाषण आसपास के लोग साफ और स्पष्ट सुनें ताकि हमारे पार्टी के नेता द्वारा लिए गए संकल्प को सब सुने और उन्हें उनका प्यार और सपोर्ट मिले।”

“सर आप डीजे साउंड को थर्ड फ्लोर पर काहे करवा रहे हैं ? अरे शपथ समारोह हो रहा है थोड़े ना कोई शादी-ब्याह हो रहा है जो सबको नागिन डांस करवाना है। हमको तो लगता है साउंडवा यही रहने दीजिए।” एक डेकोरेटर भैया ने बोला।

“देखिए आपको जो कहा जा रहा है वह कीजिए। आप हमें सलाह मत दीजिए। हम लोगों को पता है कहां साउंड लगवानी है और कहां फूलों का गुलदस्ता। ठीक है!” दूसरे छात्र ने थोड़ा रूखापन होकर बोला।

यह सुनकर डेकोरेटर बेचारा चुपचाप अपने दो साथी को बुलाकर  वहां से डीजे साउंड उठाकर थर्ड फ्लोर पर लेकर जाने लगा।

एक घंटे बाद लगभग पूरी तैयारियां हो चुकी थी। कॉलेज के मैदान में स्टेज बना कर सजा दिया गया था। कॉलेज के दरवाजे को फूलों से सजाया गया था , प्रिंसिपल कक्ष के साथ-साथ छात्र नेता के ऑफिस को भी गेंदे के फूलों से सजाया जा चुका था।

लगभग 11 बजे तक पूरा कॉलेज डेकोरेट होकर तैयार हो चुका था। कॉलेज के मैदान में एक बढ़िया सा स्टेज भी सज कर तैयार हो चुकी थी। शपथ समारोह कार्य 2:00 बजे से शुरू होने वाली थी। धीरे-धीरे लगभग कॉलेज के सारे बच्चे आ चुके थे। राहुल भैया , दीपा एवं कुछ अन्य विद्यार्थी इधर-उधर कामों में काफी व्यस्त दिख रहे थे। जबकि मैं अभी तक कॉलेज नहीं पहुंचा था।

मुझे अपने घर से शपथ समारोह में जाने की इजाजत नहीं दी गयी थी।कल के घटना को लेकर घर वाले डरे हुए थे। मैं बेचैन था। मैं किस तरह कॉलेज पहुँचूं क्योंकि मैं जानता था अगर वह इस वक्त कॉलेज नहीं गया तो लोगों को लगेगा मैं डरकर कॉलेज नहीं आया।

मैं अपने कमरे में तैयार हो रहा था । लगभग कपड़े पहन कर तैयार ही था निकलने को उसी बीच कमरे में  मां आयी और बोली, “कहां जा रहे हो? दवा खा लिया?”

“जी मां दवाई मैंने खा ली है और फिलहाल कॉलेज जा रहा हूं।” मैंने कहा।

“निशांत बेटा , मैं तुम्हें लेकर चिंतित हूं। मैं नहीं जानता हूं कि तुम्हें वहां जाना कितना जरूरी है या फिर तुम्हें शपथ लेना कितना जरूरी है मगर मैं इतना जरूर जानता हूं कि तुम इस परिवार के लिए, मेरे लिए बहुत ज्यादा जरूरी हो। इसीलिए मैं तुमसे अनुरोध करता हूं कि बेटा कॉलेज न जाओ। क्योंकि जो घटना कल हुआ है। वह कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है। अगर समय पर तुम्हें अस्पताल ना लाया गया होता तो पता नहीं क्या हो जाता।” निशांत की मां लगभग निशांत को समझाते हुए बोली। 

“मां! ऐसा कुछ नहीं है। मुझे कुछ नहीं होगा, और तुम इतना डरती क्यों है ? अरे मैं कोई युद्ध करने थोड़ी जा रहा हूं! मैं कॉलेज जा रहा हूं और अपने कॉलेज जाने में इतना डरने की कोई जरूरत नहीं है।” 

“मैं तुझे अंतिम बार बोल रही हूं। तुम आज कॉलेज नहीं जाओगे मतलब नहीं जाओगे।” गुस्से से बोलकर मां कमरे से बाहर चली गयी।

गुस्से में मैं कमरे में लगी टेबल पर एक जोरदार मुक्का मारा और अपना सर पकड़ कर बेड पर बैठ गया। अब मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि  कॉलेज जाए तो जाए कैसे!  मैंने अपना फोन ढूंढा और सबसे पहले दीपा को फोन किया,“हेलो दीपा!”

“यार निशांत तुम अब तक कहां हो? यहां कॉलेज में सारी तैयारीयां हो गई है। सभी लोग आ चुके हैं। बस तुम्हारा इंतेज़ार है।” दीपा बोली।

“यार मैं घर पर ही हूं। मां मुझे कॉलेज जाने नहीं दे रही है। मुझे समझ नहीं आ रहा मैं क्या करूं!”

“मैं आंटी से बात करूं क्या?”

“अरे नहीं यार वह किसी की भी नहीं सुनने वाली, मुझे ही कुछ उपाय करना पड़ेगा” 

“ओके फिर जल्दी कोई उपाय देखो।अब शपथ लेने का समय भी होने को आ रही है।” बोल कर दीपा कॉल डिस्ककनेक्ट कर दी।

“दीपा निशान्त से बात हुई क्या ? .. उसे जल्द से जल्द कॉलेज आने को बोलो” राहुल भैया आते ही दीपा से बोले।

“हां भैया उससे बात हो गई है और वह आ रहा है।”

“ओके, तुम लड़कियों को देखो और मैं लड़कों से जो भी तैयारियां बच गई है उसे पूरी करवाता हूं।” 

राहुल भैया बोल कर वहां से चले गए। कॉलेज में तैयारियां लगभग पूरी हो ही चुकी थी मगर इधर मैं अपने घर में ही कैद था । मैं चाह कर भी घर से कॉलेज नहीं जा सकता था। मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि मैं आखिर करूँ तो क्या ! फिर अचानक से मेरे दिमाग में कुछ आया और अर्जुन भैया को कॉल लगाया।

अर्जुन भैया का कॉलिंग की रिंग बजती रही मगर अर्जुन भैया की तरफ से कोई रिस्पांस नहीं आया। मैंने अर्जुन भैया के नंबर को कई बार डायल किया मगर फिर भी कोई रिस्पांस नहीं आया। शायद अर्जुन भैया किसी मीटिंग में बिजी थे। जिसके कारण वह कॉल रिसीव नहीं कर पा रहे थे।

आदिति भाभी को यह सब देख कर अच्छा नहीं लग रहा था क्योंकि आदिति भाभी भी जानते थे कि मुझे कॉलेज जाना कितना जरूरी है। मगर वह चाह कर भी कोई हेल्प नहीं कर पा रही थी। फिर अचानक से आदिति भाभी के दिमाग में कुछ आया फिर उसने मेरे कमरे में आकर कहा, “निशांत तुम तैयार हो जाओ और कॉलेज जाओ ।” 

“लेकिन भाभी ?”

“लेकिन-वेकिन कुछ नहीं, बस तुम कॉलेज जाओ मैं यहां देख लूंगी। मां को और भैया को सब को समझा दूंगी। फिलहाल तुम्हें अभी कॉलेज जाना इंपोर्टेड है। तुम जाओ।” 

यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ। मैं भाभी को धन्यवाद बोला और वहां से निकलने की कोशिश किया। 

“निशांत! सुनो। लेकिन तुम अपनी बाइक से कॉलेज नहीं जाओगे क्योंकि मां बगल की कमरे में ही है औऱ शायद वो बाइक की आवाज सुनकर बाहर चले आए। इसलिए तुम बाहर जाओ और कोई टैक्सी बुक कर लो और कॉलेज चले जाओ।”

“ओक भाभी! थैंक्यू।”  मैं वहां से चहकते हुए निकल गया।

मैं इतना जल्दीबाजी में घर से निकला की टेबल पर रखा अपना फ़ोन भी लेना भूल गया। सड़क किनारे आकर टैक्सी का इंतजार करने लगा।

वहीं कॉलेज में इधर माइक से अनाउंसमेंट शुरू हो जाती है। 

“हेल्लो… हेल्लो…. माइक टेस्टिंग.. हेल्लो !… सभी छात्रों से अनुरोध है कि सभी अपनी-अपनी जगह कुर्सियों पर बैठे। जल्द ही शपथ समारोह शुरू होने वाली है।” 

यह सुनकर सभी छात्र हलचल में आ जाते हैं और सभी छात्र अपने-अपने जगह की कुर्सियों पर बैठ जाते हैं।

“अरे बैठ जाएंगे भाई बैठ जाएंगे! पहले नेता जी को तो आ जाने दीजिए। क्या पता वह आये ही नहीं।” देवांशु अपने दोस्तों के साथ दूर से ही हंसकर बोला। 

देवांशु इस बात से निश्चिंत था कि निशांत शपथ समारोह में नहीं आएगा। क्योंकि वह अच्छी तरह से जानता था कि जिस तरह से उसके साथ कल एक्सीडेंट किया गया है, उस हालात में तो आज क्या वह कॉलेज में कभी नहीं आ पाएगा।

“देवांशु यार तुम्हें क्या लगता है जो कॉलेज में इतनी बकचोदियां हो रही है उसका फ़ायदा होने वाला है ? क्या सच में निशांत शपथ समारोह में आएगा या फिर यह सारे शाज-बाज ऐसे ही रह जाएगा? और क्या सभी छात्रों की मेहनत पानी में चला जाएगा?” देवांशु के एक दोस्त ने पूछा।

“अबे तुम कल की बात भूल गया! मैं तो लिख कर देता हूं, निशांत यहां नहीं आएगा। मैंने तो सुना है अभी वह हॉस्पिटल में ही एडमिट है।” देवांशु कूटनीतिक हंसी के साथ बोला।

“लेकिन यार ! राहुल भैया और दीपा को देखकर ऐसा क्यों लगता है कि निशांत यहां आने वाला है वरना इन लोगों के चेहरे पर इतना कॉन्फिडेंस कैसे है?”

“अबे छोड़ो बे ये सब। निशान्त यहां नहीं आने वाला है।” देवांशु यह बोल कर वहां से चला गया।

इधर सड़क किनारे 15-20 मिनट  खड़े रहने के बाद मुझे एक टैक्सी मिली। मैंने टैक्सी को हाथ देकर रोका और उस टैक्सी से कॉलेज के लिए चल पड़ा। 

“भैया एएनएम कॉलेज कितने देर में पहुंचा दोगे?” मैंने टैक्सी में बैठते के साथ ही टैक्सी ड्राइवर से पूछा।

“अगर ट्रैफिक नहीं रहा तो सर 10 से 15 मिनट में पहुंचा दूंगा। अगर ट्रैफिक रहा तो कुछ कह नहीं सकते। कभी-कभी तो 1 से 2 घंटे तक जाम में फंसा रहता हूं।”

मैंने अपनी घड़ी को देखा शपथ समारोह शुरू होने में मात्र 1 घंटे की देरी थी। “ओह! शिट !…….भैया कोशिश करना जल्दी पहुंचा देना अर्जेंट है यार।” 

“सर मैं अपनी तरफ से कोशिश तो करूंगा ही आप चिंता ना करें। आपको समय से कॉलेज पहुंचा दूंगा।” इतना बोलकर टैक्सी ड्राइवर टैक्सी की स्पीड तेज कर कर दिया।

टैक्सी को चला हुआ लगभग 10 मिनट हो चुका था। निशांत को लगने लगा था कि अब वह जल्द ही कॉलेज पहुंच जाएंगे। और जल्द वह स्टेज पर होंगे, अपने कॉलेज के आगे बढ़ाने के लिए कसमें ले रहे होंगे। वह खुद को कॉलेज छात्र संघ चुनाव के एक बेहतरीन नेता के रूप में खुद को उभरता हुआ देख रहा था तभी अचानक से उसे कुछ पटाखे जैसी आवाज सुनाई दिया और टैक्सी को अचानक से रुक जाने का ऐहसास हुआ।

 “क्या हुआ भैया?” मैंने टैक्सी ड्राइवर से पूछा। 

“ओह.. हट..साला..टायर फट गया।”ड्राइवर खुद से बुदबुदाया।

 “क्या!” 

“सर वो टायर पंचर हो गया।”

“ओह शीट यार! ……. अब टायर बदलने में कितना समय लगेगा ?” मैं इधर -उधर देखते हुए गुस्से में खुद को संभालते हुए बोला।

“सर हम टायर नहीं बदल पाएंगे हमरा पास स्टैपनी में फिलहाल कोई टायर नहीं है। टायर था जो कल एक टैक्सी वाले को  दे दिए थे। उसकी भी टायर पंचर हो गया था तो मदद कर दिये।” 

“तो अब क्या होगा?”

“सर आप चिंता ना करें । आप थोड़ा इंतजार कीजिए जैसे ही कोई टैक्सी आता है तो हम आपको उस पर लिफ्ट देवा देंगे” 

इस वक्त मैं गुस्से से तिलमिला रहा था। मैं किसी तरह से शांत होकर सड़क किनारे फिर से एक टैक्सी का इंतजार करने लगा। मुझे लग रहा था, साला इससे अच्छा घर से बाइक लेकर ही निकलता। 

राहुल भैया, दीपा और कुछ लड़के प्रिंसिपल केबिन में बैठे हुए थे। प्रिंसिपल इन लोगों से जानना चाह रहे थे आखिर निशांत अब तक क्यों नहीं आया है।

“तुम लोग कह रहे हो निशांत आने वाला है। कब आएगा ? शपथ समारोह होने में मात्र 25 मिनट बच रहा है। और इस शपथ समारोह में कुम्हरा विधानसभा क्षेत्र के विधायक भी आने वाले हैं। उन्हें इस छात्र संघ चुनाव में पहली दफा इंटरेस्ट जागा है और इसलिए आना चाहते हैं। अब मैं उन्हें क्या जवाब दूंगा। अगर समय से विधायक पहुंच गए शपथ समारोह देखने के लिए मगर कॉलेज के  छात्र नेता नहीं पहुंच पाया तो ?”

 “सर वह घर से निकल चुका है। मैंने बात किया है। वह जल्द ही कॉलेज पहुंच जाएगा।” दीपा प्रिंसिपल से बोली।” 

“हां सर अब थोड़ा समय और इंतजार कीजिए। वह विधायक साहब के आने से पहले ही पहुंच जाएगा। आप परेशान मत होइए।” राहुल भैया ने कहा।

सभी लोग प्रिंसिपल ऑफिस से बाहर आ गए और दीपा निशांत के नंबर पर बार-बार कॉल करने लगी। मगर उसका फोन कोई रिसीव नहीं कर रहा था। जिसके कारण दीपा और राहुल भैया के चिंता और भी बढ़ गई थी। फिर अचानक उनके कानों में गाड़ियां आने की सायरन सुनाई पड़ा। 

विधायक साहब के काफिला कॉलेज पहुंच चुकी थी। उन्हें देख कर सभी लोग हैरान थे। आखिर एक छोटा-सा छात्र संघ चुनाव के लिए इतना बड़ा विधायक कॉलेज क्यों आया है? आखिर यहां उसको क्या फायदा होने वाला है ? लेकिन यह इस बात से सभी लोग अनजान थे की नेता, मंत्री और विधायक हमेशा उसी जगह पर जाते हैं जहां उसका फायदा हो।

 बिना फायदा के तो वह अपने बाप के घर भी नहीं जाते है। छात्र संघ चुनाव से भी उसे कुछ उम्मीद थी क्योंकि वह जानता था कि जितना शक्ति युवा में और छात्र में होता है। वह शक्ति किसी भी देश के किसी भी जनता में नहीं होती।

अगले 6 महीने बाद ही विधानसभा के चुनाव होने वाली थी और विधायक जी इस छात्र संघ चुनाव में आकर छात्रों से मिलकर अपना वोट बनाना चाह रहे थे। तभी तो बिना इनवाइट के ही अपने सचिव से रिक्वेस्ट भिजवा कर कॉलेज आ रहे थे। क्योंकि वह जानते थे कि अगर इस कॉलेज के चौबीस सौ (2400) छात्रों को कन्वेंस कर ले तो कम से कम बीस हजार (20,000) वोट तो उसके बढ़ ही जाएंगे। क्योंकि यही युवा अपने शहर कस्बे में जाकर नेताजी का गुणगान करेंगे तो उनका वोट बढ़ जाएंगे।

नेता जी अपना गाड़ी से निकल कर अपने बॉडीगार्ड के साथ प्रिंसपल केबिन में पहुंचा। प्रिंसिपल साहब खड़े होकर विधायक को देखकर नमस्कार किया और बैठने का इशारा किया। 

विधायक साहब कुछ देर इधर-उधर की बात करने के बाद अपने मेन मुद्दे पर आ गए। और जल्द से जल्द स्टेज पर आकर छात्रों से रूबरु होने के लिए बेचैन हो उठे। इधर प्रिंसपल खुद ही परेशान थे , क्योंकि उन्हें पता था जो विधायक खुद अपने रैली में देर से पहुँचता है उसे यहां इंतेज़ार करवाना सही नही लग रहा था। फिर अचानक से किसी ने आकर बताया ,”निशांत आ गया है।”

यह सुनकर प्रिंसपल साहब को थोड़ा जान में जान आया। निशांत किसी तरह लिफ़्ट लेकर कॉलेज पहुँच चुका था और आकर सबसे पहले राहुल भैया और दीपा से मिल कर सारा जायज़ा ले लिया था। विधयाक जी ज्यादा देर केबिन में अंदर ना रह सके वह जल्द ही स्टेज पर आकर अपना गुणगान करने लगे।

“प्यारे बच्चो , आप लोग देश के भविष्य हो औऱ इस बार से लगभग सभी लोग हम जैसे नेताओ का भी भविष्य तय करने वाले हो। क्योंकि आप सबों की वोट देने की उम्र का तय सीमा पूरी हो गयी है। तो आप सब से अनुरोध करूँगा की आप अपना पहला वोट मुझे देकर अपने कॉलेज और अपने देश के विकास में योगदान दें।”

नेता जी अपने भाषण के समाप्ति के बाद कॉलेज से अपने काफिला के साथ निकल गए। सब लोग हैरान थे आखिरी विधायक जी कॉलेज के छात्र संघ के शपथ समारोह में आए थे तो बिना समारोह हुए चले क्यों गए! फिर लोगों के समझ में आ गया कि वह अपने जिस मकसद से यहां आए थे वह अपना काम करके वापस चले गए। 

कुछ देर बाद शपथ समारोह शुरू हुआ स्टेज पर निशांत के जोरदार तालियों से स्वागत किया गया उनके साथ स्टेज पर दीपा राहुल भैया एवं कुछ सर्पोटिंग छात्र और प्रिंसिपल महोदय भी थे उन्हें शपथ दिलवाया गया।

“मैं निशांत कुमार शर्मा भगवान एवं संविधान को साक्षी मानकर शपथ लेता हूं कि कॉलेज के नियमों एवं यहां की हर विधि विधान को मानूंगा और साथ ही यहां के छात्र एवं शिक्षक शिक्षिकाओं के समस्याओं के हल के तथा कॉलेज के विकास के लिए तत्पर काम करूंगा। साथ ही यहां छात्र छात्राओं के सुरक्षा एवं प्राइवेसी की रखूंगा।…..” 

निशांत के शपथ खत्म होते ही वहां उपस्थित विद्यार्थी सिवा देवांशु को छोड़ सभी जोरदार तालियों से स्वागत किया। साथ ही प्रिंसिपल ने निशांत के पीठ पर थपथपाई देकर आशीर्वाद दिया।

“निशांत भैया जिंदाबाद…. जिंदाबाद… ज़िंदाबाद..” सभी लोगों ने जोर जोर से नारा लगाने लगे। 

निशांत ने लोगों को शांत कराते हुए कहा “दोस्तों आज से यहां की विकास और आप लोगों की मदद करना मेरा कर्तव्य है। तो मैं अभी से आप लोगों को लिए शिकायत पेटी का नियम की शुरुआत करता हूं। आप लोगों में से किसी के पास अगर कोई शिकायत है तो एक पर्ची में लिख कर यहां स्टेज पर पहुंचा दें। उसे हम जल्द से जल्द सॉल्व करने की कोशिश करेंगे और इसी तरह का शिकायत पेटी कॉलेज के हर क्लास रूम के पास लगाया जाएगा। जिन छात्र-छात्राओं को किसी तरह की कोई असुविधा होगी या किसी तरह का कोई शिकायत होगा, वह अपना लिखित शिकायत उस शिकायत पेटी में डालेंगे और उसे जल्द से जल्द हम लोग मिलकर दूर करेंगे।…. तो चलिए शुरू करते हैं इस नियम को अभी से ही, जिनके पास कोई शिकायत है तो लिखकर मेरे पास पहुंच दें।” 

निशांत की बात खत्म होते ही इस नियम का स्वागत लोगों ने जोरदार तालियों के साथ किया। कुछ लोगों ने कलम और काग़ज निकाल कर अपनी शिकायत लिखने लगे। एक लड़की ने शिकायत लिखकर स्टेज के पास पहुंचा दिया। निशांत उस पर्ची को जैसे ही खोला उसे पढ़कर उसकी दिमाग हिल गया। वह सोचने लगा, “क्या यहां इस तरह की भी परेशानी हो रही थी?” 

Continue…….

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This entry is part 20 of 23 in the series तेरी - मेरी आशिक़ी

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