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Teri-Meri Aashiqui। तेरी – मेरी आशिकी। Part – 17। हिंदी कहानी

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Author- अविनाश अकेला 

तेरी-मेरी आशिकी का Part- 16 पढने के लिए यहाँ क्लिक करे

अगले दिन हम दोनों कॉलेज पहुंचे । मैंने दीपा ,राहुल भैया और उनके कई सारे  दोस्तों के साथ ऑफिस पहुंच कर  छात्र संघ चुनाव के लिए नॉमिनेशन फार्म भरा ।  नॉमिनेशन फार्म  भरने के बाद हम सभी चुनाव रणनीति बनाने के लिये एक मीटिंग रखा । उस मीटिंग में राहुल भैया के बहुत सारे दोस्त ,मेरे क्लासमेट के अलावे दीपा भी मेरे साथ थी ।

मुझे यह देख कर बहुत खुशी हो रही थी कि दीपा  अब दिवांशु के साथ ना होकर मेरे साथ मेरी  जीत के लिए रणनीति बना रही है।

हॉल में इतने सारे विद्यार्थियों को अपने सपोर्ट में खड़ा देख मुझे अपनी  जीत की निश्चित हो गया था ।

 देवांशु यह जानकर हैरान था कि उसके विरोध में अब मैं भी चुनाव लड़ रहा हूं और उसकी परेशानी का दूसरी वजह दीपा भी  थी क्योंकि अब दीपा उसकी कोई बात ना सुनकर मेरे लिए प्रचार कर रही थी ।

“आप लोगों को पता है, मैं इस चुनाव में क्यों खड़ा हुआ हूं । कॉलेज में हो रही  रैंगिंग और फैकेल्टी प्रॉब्लम को दूर करना ही मेरा मकसद है और इसे दूर करने के लिए ही मैं इस चुनाव का हिस्सा बना हूँ । बस आप लोग अपना वोट मुझे दें और साथ में अपने दोस्तों से दिलवाये  ताकि  मैं

जीतकर कॉलेज में चली आ रही परेशानियों को दूर करूं।” मीटिंग शुरू करते ही मैंने उपस्थित सभी विधार्थियों से  बोला ।

मेरी इतनी  बात खत्म होने के बाद सभी लोगों  की तालियों से पूरा क्लास रूम  गूंज उठा ।

“मैं जानता हूं आपके सपोर्ट के बिना  कुछ भी हो पाना असंभव है, इसीलिए मैं आप में से कुछ लोगों को चुनकर उन्हें  चुनाव की कुछ जिम्मेदारी देंगे ताकि हम इस चुनाव जीतने में सफल हो सके । तो क्या आप लोग मेरे साथ खड़े हो?”

“हां हम लोग आपके साथ हैं” सभी एक साथ बोल पड़े ।

“ कॉलेज में प्रचार-प्रसार की सारी जिम्मेदारी राहुल भैया निभाएंगे” मैंने कहा।

इतना कहने के बाद राहुल भैया के स्वागत के लिए उपस्थित सभी लोग जोड़दार तालियां बजाएं।

“दूसरी जिम्मेदारी मैं  विक्रम को दूंगा । वह  छात्र संघ चुनाव अन्य सभी उम्मीदवार पर नजर रखें की वो लोग  हमारी विरोध में क्या कर रहे हैं फिर उसके बाद अपनी पार्टी को उससे बेहतर तरीके से लोगों के सामने पेश करेंगे ।”मैंने कहा ।

इसके बाद फिर सब लोगों ने विक्रम के लिए तालियाँ बजाया ।

“स्लोगन , संबोधन भाषण लिखने के अलावे  और लड़कियों के वोट अपनी पार्टी के लिए कन्भेन्स करने की जिम्मेदारी  दीपा को दी जाती हैं ।” मेरी यह बात खत्म होते ही पूरे हॉल में तालियां की आवाज  फिर से एक बार गूंज उठी ।

इसके अलावा भी मैंने छोटे-छोटे जिम्मेदारी और भी लोगों को दे दिया क्योंकि हम जानते थे कि किसी भी चुनाव को जीतने के लिए एक अच्छी रणनीति और सभी विद्यार्थियों से सही तरीके से संपर्क होना जरूरी था ।

उस मीटिंग के बाद हम सब अपने -अपने काम में लग गए । अब  कॉलेज में मेरी फोटो वाली  छोटे-छोटे प्रचार पेपर लोगों तक पहुंचने लगा । कॉलेज की दीवार पर हर जगह मेरी ही प्रचार पेपर चिपकी  थी ।

अब मैं काफी खुश रहा करता  था । दीपा हमेशा मेरे साथ ही  रहती थी ।  चुनाव के लिए कुछ ना कुछ नए आइडिया बताती रहती थी । जिसे हम चुनाव को जीत सके ।

एक  दिन  कॉलेज में मैं  क्लास रूम से बाहर आ रहा था तभी मेरी मुलाकात देवांशु से हुआ । उसने मुझे रोकते हुए बोला, “क्यों बे तुम्हें क्या लगता है तुम मेरे विरोध में खड़ा होकर चुनाव जीत जाओगे ? और जो दीपा आजकल तुम्हारे पीछे-पीछे घूम रही है इससे तुम्हें क्या लगता है दीपा अब तुम्हारी हो जाएगी?  दीपा की पीछा करना छोड़ दो ।”

“देखो देवांशु मैं तुझे पहले भी समझा चुका हूं, मुझे तुमसे कोई पंगा नहीं करना है । बात रही दीपा की  तो  उसे मेरे साथ रहना  ही अच्छा लगता है । मुझे  जो काम करना चाहिए वह कर रहा हूं । तुम अपना काम देखो और हां एक बात कान खोल कर सुन लो दीपा सिर्फ मेरे पीछे -पीछे नहीं रहती है बल्कि दीपा मुझसे प्यार भी करती है।” मैंने कहा।

“दीपा तुम्हें प्यार करती है या तुम उससे प्यार करते हो? यह तो मुझे पता नहीं लेकिन तू कान खोल कर सुन लो । मैं दीपा को पसंद करता हूं और मैं जिस चीज को पसंद करता हूं वह मेरी हो जाती है।” देवांशु मुझे उंगली दिखाते हुए कहा ।

 “अगर अगली बार दीपा की नाम भी लिया तो तुझे…… खैर छोड़ो तुम जैसे लोगों से बात करना ही बेकार है।” मैं आगे बढ़ने लगा।

“ओ… निशांत रुको इतनी भी क्या जल्दी है । कहां जा रहे हो?  भाई चलो आपस में लड़ने से कोई फायदा नहीं है। हम दोनों एक डील (Deal ) कर लेते हैं ।” मुझे रोकते हुए देवांशु बोला ।

“डील… कैसा डील?” मैंने चौकते हुए  बोला ।

“देखो तुम  दीपा से प्यार करते हो , चलो मैं तुम्हारे लिए दीपा  के पीछा  करना छोड़ देता हूँ  लेकिन इसके बदले में तुम्हें छात्र संघ चुनाव से अपना नाम वापस लेना होगा” देवांशु बोला।

“पहली बात डील (deal ) हमेशा एक समान चीजों के साथ किया जाता है । और यहां दीपा और चुनाव दोनों अलग -अलग चीजें है । तो यह डील तो किसी भी सुरत में नही हो सकती!” मैं बोल कर वहां से चला गया ।

हमारे चुनाव प्रचार सही तरीके से हो रहे थे। कॉलेज की सभी विद्यार्थी लगभग मेरे ही  सपोर्ट में थे । इस चुनाव प्रचार में दीपा भी हमेशा मेरे हर कदम पर मेरे साथ थी। कुछ दिन बाद ही वोटिंग होने वाले थे। चुनाव से एक दिन पहले हम फिर से एक मीटिंग बैठाया जिसमें कॉलेज के अधिकतर विद्यार्थियों ने उपस्थिति दर्ज करवाएं । उस मीटिंग में राहुल भैया दीपा द्वारा लिखी संबोधन भाषण बोलकर सभी विद्यार्थियों का दिल जीत लिया।

अगले दिन  वोटिंग हुआ । सब विद्यार्थियों ने  वोट किया । उस दिन दीपा मेरी जीत के लिए भगवान से मंदिरों में जाकर प्रार्थनाएं किया। 2 दिन बाद  छात्रसंघ चुनाव के विजेता उम्मीदवार के नाम घोषित होने वाले थे ।

विजेता घोषित होने वाले दिन हम सभी लोग कॉलेज में थे । उस दिन मैं बहुत नर्वस हो रहा था  लेकिन राहुल भैया और दीपा मुझे हमेशा की तरह उस दिन भी जीत की उम्मीद  दिलासा देकर मेरे साथ थे । कॉलेज के सभी फैकल्टी स्टेज पर बैठे थे और कॉलेज के विद्यार्थियों और उम्मीदवार कुर्सी पर ग्राउंड में बैठे थे । कुछ देर बाद छात्र संघ चुनाव आयोग  ने विजेता उम्मीदवार का नाम अनाउंस किया।

जिस वक्त छात्र संघ चुनाव आयोग के अध्यक्ष विजेता के नाम बताने वाले थे । उस वक्त मेरी धड़कने जोरों से धड़क रही थी । मेरी बगल में बैठे दीपा मेरे हाथ को अपने हाथों से पकड़ रखी थी । शायद वह मेरी जीत के लिए उस वक्त भी  भगवान से दुआएं मांग रही थी।

जैसे ही विजेता के रूप में मेरा नाम घोषित हुआ वह खुशी से उछल पड़ी। मैं जीत गया था । मेरे आंखों में खुशी के आंसू डबडबा आया । दीपा मुझसे लिपट गई । उसके बाद राहुल भैया आकर  मुझे गले मिलें । इसके साथ ही कॉलेज के सभी विद्यार्थी मेरे पास आकर मेरी जीत की बधाइयां देने लगे ।मैं  बहुत खुश था और मुझसे कहीं अधिक खुश दीपा थी।

मुहब्बत में हमेशा एक की जीत दोनों की खुशी के लिए पर्याप्त होती है । उस वक्त यही कारण थी कि मेरी जीत  पर दीपा मुझसे कहीं ज्यादा खुश दिख रही थी।

Continue….

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This entry is part 17 of 23 in the series तेरी - मेरी आशिक़ी

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